Monday, May 30, 2011

ममता


  
ममता माँ की 
निःस्वार्थ सतत ही 
है अनमोल 

गोद समेटे 
धरा और जननी 
यही शाश्वत

दिव्य नर्मदा 
अचल हिमालय 
भारत भूमि 

अतिथि सेवा 
है संस्कार युगों से 
मानो सौभाग्य 

शून्य दिया है 
आयुर्वेद औ योग 
रहो विनम्र 

-कुसुम ठाकुर-


5 comments:

  1. बहुत ही प्रभावशाली है सभी हाइकू!
    --
    यह भी देखे-
    नेट के सम्बन्ध
    एक क्लिक में शुरू
    दूसरे में बन्द
    --

    ReplyDelete
  2. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 31 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    साप्ताहिक काव्य मंच --- चर्चामंच

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छे हाइकू...

    ReplyDelete
  4. अच्छे है सभी हाईकू. एकदम सटीक भाव. शुभकामनायें.

    ReplyDelete