Tuesday, September 14, 2010

शिष्य देखल !!


"शिष्य देखल "

विद्वान छथि  
ओ शिष्य कहाबथि  
छथि विनम्र 

गुरु हुनक 
सौभाग्य हमर ई 
ओ भेंटलथि

इच्छा हुनक 
बनल छी माध्यम
तरि जायब 

भरोस छैन्ह 
छी हमर प्रयास
परिणाम की ?

भाषा प्रेमक 
नहि उदाहरण 
छथि व्यक्तित्व 

छैन्ह उद्गार
देखल उपासक  
नहि उपमा 

कहथि नहि
विवेकपूर्ण छथि 
उत्तम लोक  

सामर्थ्य छैन्ह 
प्रोत्साहन अद्भुत 
हुलसगर

प्रयास करि 
उत्तम फल भेंटs 
तs कोन हानि 

सेवा करथि 
गंगाक उपासक 
छथि सलिल 

- कुसुम ठाकुर -

8 comments:

  1. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीगेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से


    कृपया अपने ब्लॉग से वर्ड वैरिफ़िकेशन को हटा देवे इससे लोगों को टिप्पणी देने में दिक्कत आती है।

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  2. waah !

    bahut khoob !

    kusum ji ka yahaan bhi swaagat hai

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  3. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  4. वाह ! बहुत सुन्दर ....आभार आपका
    यहाँ भी पधारे
    विरक्ति पथ

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